Tuesday, October 12, 2010

मुझे अपने परिवार में एक बेटी कि कमी हमेशा से ही खलती रही है. इश्वर ने मुझे अपनी बेटी नहीं दी पर उसने मुझे ऐसे दोस्त दिए थे जिनकी बेटियों ने कभी भी मुझे बेटी न होने का दुःख अनुभव नहीं हिने दिया. फिर यह कमी खलने लगी कि मेरिऊ वह बेटियां हमेशा मेरे साथ नहीं रहतीं थीं. खैर ....

जैसे जैसे मेरे बाते बड़े होने लगे और उनकी शादी कि बात चलाने लगा, मेरे मन में एक दूसरी आशा ने जनम लेना शुरू कर दिया कि मैं 'बहू' में "बेटी" देखूंगा और मेरी अधूरी इच्छा पूरी हो जाएगी. मन ने खुद को समझाया कि अपनी बेटी तो किसी दिन दूसरे घर चली जाती, पर यह बेटी तो हमेशा के लिए मेरे ही घर में ही रहेगी.

बड़े शौक से मैंने भरत कि शादी की, मैंने सिर्फ दो ही चीजें देखी -१) पढ़ी-लिखी लड़की हीनी चाहिए, और २) लड़की बड़े परिवार से होनी चाहिए. लोगों ने यहाँ तक की लड़कियों के पिताओं ने भी मुझसे रुपये-पैसों के बारे में पूछा, पर मैंने सिर्फ एक ही बात कही थी कि वह सिर्फ बरात की अच्छी खातिर कर दें और कुछ ना भी करें तो मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता है. मेरी नज़र में विवाह में पैसों की बात करने से घटिया कोई और बात हो ही नहीं सकती है. जिस किसी ने भी मुझे जब कोई सम्बन्ध बताया और पैसों की बात की तो मेरा हमेशा यही कहना था कि मुझे यदि अपनी बेटी देनी होती तो मैं लड़के वालों के पैसों और सामर्थ्य कि ओर देखता, पर जब मुझे लड़की अपने घर में लानी है तो फिर उसके घर के पैसों को देखने की मेरे लिए कोई ज़रुरत नहीं थी.

भाग्यवश मेरे एक मित्र ने मुझे अपने एक और मित्र की लड़की के बारे में बताया. मैं लड़की के पिताजी को कई सालों से जानता था और मुझे वह इंसान बहुत ज्यादा पसंद भी था क्योंकि वह मन से बेहद सीधा और साफ़ था. उन्हें देख कर मुझे हमेशा अपने ससुर जी की याद आती थी क्योंकि न सिर्फ उनका स्वभाव बल्कि उनकी सूरत भी मेरे ससुर जी इ ८०% मेल खाती थी. वोह आसनसोल के एक बहुत बड़े और इज्ज़तदार परिवार के थे पर मैं उनके अलावा उनके अपने परिवार के लोगों को नहीं जानता था, जबकि उनके बाकी भाइयों के परिवारों को मैं अच्छी तरह से जानता था और करीब-करीब पूरा आसनसोल भी मुझे और मेरे परिवार को अच्छी तरह से जानता है.

मेरे मित्र ने मुझे अपने घर में बुला कर लड़की दिखाई और यह भी बताया की लड़की के पिता की माली हालत कुछ अच्छी नहीं थी और वह बस शादी ही कर सकते थे. जब बात बढ़ी तो मैंने उनसे खुल कर बोलने के लिए कहा कि वह मुझे अपना बजट बता दें और मैं इस बात का पूरा-पूरा ख़याल रखूंगा कि उनके बजट से एक पैसा भी अधिक खर्च न हो. उनहोंने मुझे बताया कि वह शादी पर कुल ५लाख खर्च कर सकते थे. मैंने उन्हें आश्वस्त किया कि मैं किसी के सामने उनकी इज्ज़त को नीचा नहीं होने दूंगा और उनको भी यही कहा कि वह शादी पर जो भी खर्च करें पहले मुझसे पूछ लें ताकि कोई भी बेकार या गैर जरूरी खर्च न हो.

उनहोंने शादी में बरात कि अच्छी खातिर कि और मैंने उनको कहा कि वह जो भी सामान अपनी बेटी को देना चाहते हैं, मैं उसे किसी को दिखाना नहीं चाहता अतः वह साड़ी चीजें पैक कर के मेरे घर में भेज दें जो कि उसी तरह से भुज चलीं जायेंगीं, और उन्होंने किया भी वैसा ही.

इतना कुछ करने के बाद शादी के ५ दिनों के बाद भारत और "बहू" आसनसोल से रवाना हुए. चूंकि बहू कभी भी प्लेन में नहीं बैठी थी, मैंने उसे पहली ख़ुशी देने के लिए दोनों को प्लेन से भेजा. उनके जाने के दस दिनों के बाद हम मियां-बीबी बहु का घर बसाने के लिए आसनसोल से भुज आ गए.

हमारे आने के दूसरे ही दिन सुबह-सवेरे मेरी पत्नी - 'मधु' ने मुझे बताया कि शायद बहू के मन में "अपना-पराया' की भावना है क्योंकि, स्नानघर में जो अच्छी साबुन कल थी उसे बदल कर एक सस्ती साबुन रख दी गयी थी. मैंने मधु को समझा-बुझा कर शांत कर दिया.

मैं भुज में ५ दिन रह कर अपने काम पर लौट गया और मधु पीछे bघर बसाने बहू को गणगौर की पूजा करवाने और उसका घर बसाने के उद्देश्य से भुज में ही रह गयी. मधु सिर्फ १५ दिनों के लिए ही रहने आई थी पर बहू के व्यवहार ने यह साबित कर दिया कि उसे सास के साथ नहीं रहना है. मधु को अपना ही घर काटने लगा और वह गर्मी का बहाना बना कर परीक्षित के पास मुंबई चली गयी. कुछ दिनों के बाद भरत और बहू भी मुंबई आये और वहाँ पर बहू ने भरत को कह ही दिया कि वह आज "आर या पार" कि बात करेगी. मधु ने बताया कि भरत अपनी मम्मी और पत्नी को ले कर करीब ३ घंटे तक बात कि और आखिर अपनी पत्नी कि बातें सुन कर झुंझला कर कहना पड़ा कि वह दोनों आपस में बात करना बंद कर दें. इतनी बातें हिने के बाद भरत और बहू शाम को घर के कम्पाउंड में अकेले घूमने निकल गए और मधु हर में ही रह गयी. उसी समय पहली बार बहू ने भरत के सामने सारे गहने खोल कर पटक दिए और आती हुई बस के नीचे मरने के लिए अड़क कि ओर भागी.आस-पास के लोगों ने किसी तरह उसे पकड़ कर रोक लिया. यह बात भरत ने घर में आ कर किसी को नहीं बतायी और पूर्व नियोजित कार्यकर्म के अनुसार मधु और बहू मुंबई से आसनसोल के लिए ट्रेन से रवाना हो गए....... क्रमशः:  

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